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Monday, March 9, 2015

एल्कोहल के गरारे करने से मसूड़ों का दर्द होता है दूर, जानें 10 Dental care tips

लाइफइस्टाइल डेस्क: हर इंसान उम्र के किसी न किसी पडाव में दंतरोगों से सामना जरूर करता है। दांतों की समस्याओं के निपटारे के लिए यूं तो बाजार में अनेक दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन केमिकल दवाओं के दुष्प्रभावों से अक्सर लेने के देने पड़ जाते हैं। प्राचीनकाल के आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी हर्बल उपचार द्वारा दांतों की समस्याओं के निपटारे के लिए अनेक नुस्खों का जिक्र किया गया है। सुदूर ग्रामीण अंचलों में आज भी आदिवासी हर्बल नुस्खों का उपयोग कर अपनी दांतों की बीमारियों का इलाज करते हैं। चलिए, आज जानते हैं दंतरोगों के लिए आदिवासियों द्वारा आजमाए जाने वाले कुछ चुनिंदा 10 हर्बल नुस्खों के बारे में।
दंतरोगों के निवारण के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहे हैं डॉ. दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्य प्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।
दारू और नकछिकनी
1-मसूड़ों को मजबूत बनाने के लिए आदिवासी दारू और हल्दी का काढ़ा बनाकर उससे गरारे करते हैं। ऐसा करने से दांतों के दर्द से राहत मिलती है।
2-दांतों में अधिक दर्द होने पर नकछिकनी को पीसकर लेप तैयार कर गुनगुना करके उससे कुल्ला कर थूक देने और गालों की सिंकाई करने से दांतों का दर्द जल्दी खत्म होता है।

अनार और काली मिर्च का उपयोग
3-अनार के फूल छाया में सुखाकर बारीक पीस कर मंजन की तरह दिन में 2 से 3 बार इस्तेमाल किया जाए तो दांतों से खून आना बंद हो जाता है और दांत मजबूत हो जाते हैं।
4- दांतों के दर्द में काली मिर्च के काढ़े से कुल्ला करने से फायदा होता है। पातालकोट के हर्बल जानकारों के अनुसार, प्रतिदिन रोज सुबह खाली पेट ऐसा करने से दंतरोग होने की संभावनाएं लगभग शून्य हो जाती हैं।

गिलोए और गुंदा की छाल
5- पातालकोट के आदिवासी मानते हैं कि गिलोय के तने और बबूल की फलियों के चूर्ण की समान मात्रा सुबह-शाम मंजन की तरह उपयोग में लायी जाए तो दांतों को ठंड या कनकनी लगनी बंद हो जाती है।
6- गुंदा की छाल की लगभग 200 ग्राम मात्रा लेकर इतनी ही मात्रा पानी में उबाल कर जब यह एक-चौथाई बच जाए तो इससे कुल्ला करने से मसूडों की सूजन, दांतों का दर्द और मुंह के छालों में आराम मिल जाता है। 

पत्तागोभी, बरगद की छाल और महुआ का उपयोग
7- पत्तागोभी का रस लगभग 75 मिली प्रतिदिन लेने से दांतों से संबंधित रोग और पायरिया आदि में लाभ होता है। इसका सलाद बनाकर खाने से भी इन सभी विकारों के में फ़ायदा होता है।
8-लगभग 10 ग्राम बरगद की छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर मंजन करने से दांतों का हिलना बंद हो जाता है। इससे सांसों की बदबू भी दूर हो जाती है। लगातार इस मंजन का उपयोग करने से दांत मोती की तरह चमकने लगते हैं। 

9-पातालकोट के आदिवासी महुआ की टहनियों का इस्तेमाल दातून के रूप में करते हैं। उनके अनुसार, ऐसा करने से दांत मजबूत होते हैं और मसूडों से खून आना बंद हो जाता है।
10-डांग- गुजरात के आदिवासी अनंतमूल के पत्तों का उपयोग दंतरोगों को दूर करने के लिए करते हैं। माना जाता है कि अनंतमूल के पत्तों को दांतों के बीच दबा लिया जाए तो यह दांत दर्द खींच लेता है।

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