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Monday, April 13, 2015

बाकी PM के मुकाबले बेहद कम सैलरी लेते हैं नरेंद्र मोदी




अप्रेजल सीजन में आप अपनी तनख्वाह की फिक्र में डूबे होंगे. लेकिन क्या आपको मालूम है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे प्रधानमंत्रियों के मुकाबले बेहद कम सैलरी लेते हैं.

प्रधानमंत्री कार्यालय का आधिकारिक समय सुबह 9 से शाम 5:30 बजे तक का है. लेकिन खबरों के मुताबिक, मोदी हर रोज 12 से 18 घंटे काम करते हैं और सिर्फ तीन घंटे की नींद लेते हैं.




इसके लिए मोदी की सालाना तनख्वाह 19.2 लाख रुपये है. यानी महीने की सैलरी 1.6 लाख रुपये हुई. इसमें पर्सनल स्टाफ, भव्य घर और दूसरी चीजें शामिल हैं.


जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की मासिक सैलरी करीब 10 लाख रुपये, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 7.5 लाख, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की सैलरी 16.8 लाख और बराक ओबामा की 20 लाख रुपये है.












Friday, April 10, 2015

दहेज मांगा, तो खाप पंचायत ने युवक की शादी पर लगाया बैन

यूपी की एक खाप पंचायत ने दहेज प्रथा पर बेहद अनूठा कदम उठाया है. खाप ने दहेज मांगने पर सेना के एक जवान के शादी करने पर 2 साल तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया.

घटना मुजफ्फरनगर जिले के रसूलपुर गांव की है. बाल्यान खाप पंचायत प्रमुख नरेश टिकैत ने कहा कि दहेज में कार मांगने पर गुरुवार शाम को जवान की शादी करने पर दो साल तक के लिए प्रतिबंध लगाया गया. इतना ही नहीं, युवक पर 81,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.

जवान की शादी 24 अप्रैल को तय हुई थी. बाद में लालच में आकर जवान के परिजनों ने कासिमपुर गांव की लड़की के परिजन से दहेज में कार की मांग की. विवाद पैदा होने के बाद लड़की के परिवारों ने जब न्याय की गुहार लगाई, तो पंचायत बुलाई गई. पंचायत में दोनों पक्षों के सदस्य मौजूद थे.












व्यंग्य: राहुल गांधी के लिए लड़की देखने विदेश दौरे पर जाते हैं मोदी

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है, तुम्हीं कहो कि ये अंदाज-ए-गुफ्तुगू क्या है.' ग़ालिब का ये शेर अगर किसी पर सबसे सही बैठता है तो वो हैं मोदी जी के विरोधी. हर बात पर घेर लेते हैं. कढ़ाई वाला सूट हो या विदेश यात्रा. कभी किसी ने तह तक जाने की कोशिश ही नहीं की. सूट वाला राज तो टेलर जाने लेकिन हम आपको बताते हैं कि पीएम मोदी किन वजहों से बार-बार विदेश जाते हैं.

चूहे छोड़ने: एक तो हम लोगों की आदत इतनी गंदी है कि अपने घर के चूहों को गली के कोने में छोड़ आते हैं. चूहा किसी और के घर घुस जाता है. तो स्वच्छ भारत अभियान की सफलता के लिए मोदी जी सबके घरों के चूहे पकड़कर विदेशों में छोड़ आते हैं. वो क्या है न, विदेशों में चूहे पालना भी ट्रेंड में है. इसे मोदी जी चूहों के बड़े निर्यातक देश के रूप में भारत के उभरने के नजरिए से भी सोचते हैं.

राहुल गांधी के लिए लड़की देखने: देश का पीएम वही होता है तो दुखियारो का दर्द समझे. घर का मासूम बालक रोता किसे अच्छा लगता है. राहुल गांधी की उम्र देश में कांग्रेस सीटों जितनी ही हो चली है. अब देश की लड़कियां तो पहले से ही फवाद खान को लेकर Awww Myy Gwaad टाइप हो चुकी हैं. ऐसे में मोदी जी पारखी नजरों के साथ विदेशी टूर के बहाने राहुल बाबा के लिए सुकन्या ढूढ़ रहे हैं. ब्याह करेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया.

घर में रहोगे तो बर्तन खनकेंगे ही: एक तो बहुमत की सरकार बन जाए तो मजाक मजाक में इत्ते सांसद इकट्ठे हो जाते हैं कि एक मंगल बाजार तो सांसदों के साथ ही लगाया जा सकता है. ऊपर से आडवाणी एंड जोशी ब्रदर्स. उफ्फ. बड़े बुजुर्गों का मायूस चेहरा देखने से अच्छा है बाहर निकल लो. वो बात अलग है मोदी जी को फेसबुक पर फीलिंग ऑसम लिखने की बजाय फ्रूटफूल टाइप जारगन गिराना पड़ता है.

विवादित बयान वाले सांसदों की दवा: सरकार बनने के बाद अगर मोदी जी की छवि पर किसी ने सबसे ज्यादा बबलगम चिपकाई है तो वो हैं बीजेपी सांसद. गिरिराज, साक्षी महाराज, साध्वी निरंजन ज्योति ही कुछ स्वर्णरजित नाम हैं. बची कुची कसर 'घर वापसी' ने पूरी कर दी. तो बस मोदी जी, इन सांसदों के बड़े बोले बयानों बाली लाइलाज बीमारी की दवा ढूंढ़ने बाहर जाते हैं. वैसे भी बचपन से कहा जाता है विदेशों में हर चीज का इलाज है.

केआरके, स्वामी, दिग्विजय सिंह और संबीत पात्रा के लिए मन्नत मांगने: हर देश का एक अपना इतिहास होता है. पेरिस में भी एक जगह है जहां ताला लगाओ और मन्नत मांगो तो पूरी हो जाती है. ऐसे ही हर देश में मन्नत मांगने का ट्रेंड है. मोदी जी हर देश जाकर केआरके, सुब्रमण्यम स्वामी, दिग्विजय सिंह और संबीत पात्रा के मुंह पर ताला लग जाए, इसके लिए मन्नत मांगने जाते हैं. क्या पता किस देश में मांगी गई मन्नत काम कर जाए और ये लोग मुंह से रायता गिराना और फालतू का फैलाना बंद कर दें. वो बात अलग है मन्नत पूरी होने पर मोदी जी को एक बार फिर उस देश जाना पड़ेगा.








Friday, April 3, 2015

निर्भया पर डॉक्यूमेंट्री बनाने वाली लेस्ली ने कहा- रेपिस्ट से कम नहीं हैं गिरिराज सिंह

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर विवादित बयान देने वाले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर अब निर्भया पर डॉक्यूमेंट्री बनाने वाली लेस्ली उडविन ने तीखा हमला बोला है. उडविन ने तो गिरिराज की तुलना बलात्कारी से ही कर दी. गिरिराज का 'राज' खोलने वाले SP का ट्रांसफर 

उडविन ने कहा, 'इस तरह के छोटी सोच के बिना सोचे-समझे दिए गए बयान मुझे परेशान करते हैं कि मेरी फिल्म के जरिए बलात्कारियों को अपनी बात रखने का प्लैटफॉर्म मिल गया. फिर भारतीय संसद ने इतने सालों से नेताओं को महिलाओं से नफरत करने वाले बयान देने का मंच क्यों दिया हुआ है. ये लोग निर्भया गैंगरेप के दोषी मुकेश सिंह की तरह बात करते हैं.' कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गिरिराज के घर पर फेंके अंडे-टमाटर 

गिरिराज को बाहर करने की मांग उडविन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गिरिराज सिंह जैसे मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर कर देना चाहिए. उन्होंने कहा, 'हमें यहां मुद्दे को समझने की जरूरत है. मुझे लगता है कि जो भी इस तरह के बयान दे, उसे सत्ता से बेदखल कर देना चाहिए.'

क्या था विवादित बयान बिहार के हाजीपुर में गिरिराज सिंह ने बयान दिया था, 'अगर राजीव गांधी कोई.... लेडी से ब्याह किए होते, गोरी चमड़ी न होती तो क्या.... कांग्रेस पार्टी नेतृत्व स्वीकारती क्या?' गिरिराज सिंह के इस बयान की जमकर निंदा हो रही है. बीजेपी के लिए अपने नेता के इस बयान का बचाव कर पाना मुश्किल हो गया है.








Saturday, March 14, 2015

AAP में ये नेता भरेंगे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव की जगह


10 फरवरी की एक तस्वीर याद कीजिए. दिल्ली के चुनाव नतीजे आ गए हैं. आम आदमी पार्टी के पटेलनगर दफ्तर की बालकनी में सीनियर AAP नेता पार्टी की जीत का जश्न मना रहे हैं. केजरीवाल के दाईं तरफ आशुतोष, बाईं तरफ कुमार विश्वास हैं. आशीष खेतान, संजय सिंह और मनीष सिसोदिया भी यहां मौजूद हैं. योगेंद्र यादव एक चैनल के स्टूडियो में जीत का विश्लेषण कर रहे हैं और प्रशांत भूषण का कुछ पता नहीं है. AAP के चेहरे अब कौन लोग होंगे, चाहें तो इसकी झलक आप इसी तस्वीर में खोज सकते हैं.

पार्टियों का सांगठनिक ढांचा कुछ स्तरों पर कंपनियों जैसा ही होता है. कोई जाता है तो तो उसकी जगह दूसरा ले लेता है. आम आदमी पार्टी में भी अब ऐसे ही हालात बन रहे हैं. पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) से योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की छु्ट्टी हो गई है और अब उन्हें पार्टी से भी निकाले जाने की मांग जोर पकड़ रही है. लेकिन इन दोनों नेताओं के 'डिमोशन' का फायदा AAP के कुछ दूसरे नेताओं को हो सकता है. योगेंद्र और प्रशांत की कमी पूरी करने के लिए केजरीवाल की पार्टी में इन नेताओं का कद बढ़ सकता है. 

1.) आशुतोष: 9 जनवरी 2014 को एक न्यूज चैनल में मैनेजिंग एडिटर का पद छोड़ आशुतोष AAP में आ गए और बहुत कम समय में केजरीवाल की फेवरेट लिस्ट में शुमार किए जाने लगे. हालिया दिल्ली चुनाव में बतौर रणनीतिकार उनके काम को पसंद किया गया. प्रवक्ता के तौर पर एकाध बार उन्होंने बड़बोलापन जरूर दिखाया है, पर कुल मिलाकर उनकी 'परफॉर्मेंस' बुरी नहीं है. अगर नई पीएसी गठित होती है तो संभव है कि आशुतोष भी उसमें जगह पा जाएं.

2.) आशीष खेतान: AAP के पत्रकार नंबर दो. अपनी खोजी खबरों और स्टिंग के बूते पहचान बनाने वाले आशीष भी पार्टी में प्रमोट किए जा सकते हैं. दिल्ली चुनाव से पहले AAP के महत्वाकांक्षी 'दिल्ली डायलॉग' की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी, जिसका पार्टी को चुनाव में खूब फायदा मिला. अपनी वेबसाइट पर वह खुद को 'खोजी पत्रकार' और 'एंटी करप्शन क्रूसेडर' बताते हैं. उनका पुराना अनुभव देखते हुए लगता है कि वह अब नए प्रशांत भूषण की भूमिका में आ सकते हैं. विपक्षियों को योजनाबद्ध तरीके से घेरने के लिए खुफिया दस्तावेजों की खोज और तथ्यों के अध्ययन का काम अब उन्हीं के जिम्मे रहेगा. बताया जाता है कि वह पीएसी की वेटिंग लिस्ट में भी हैं.

3.) संजय सिंह: मनीष सिसोदिया के बाद केजरीवाल किसी पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, तो वह संजय ही हैं. टिकट बंटवारे से लेकर अंदरूनी फैसलों तक, संजय सिंह ने पार्टी पर अच्छा-खासा नियंत्रण बना लिया है. अगर केजरीवाल निकट भविष्य में कभी भी संयोजक पद छोड़ते हैं और कोई बड़ा प्रयोग नहीं करते तो संजय की दावेदारी सबसे बड़ी होगी. योगेंद्र और प्रशांत के डिमोशन से उन कद्दावर व्यक्तित्वों की भी विदाई हो गई है जो आगे चलकर इस रेस में संजय के मुकाबले खड़े हो सकते थे.


4.) कुमार विश्वास: मगर कुमार की दावेदारी बची हुई है. पार्टी की सभी बेचैनियों को कुमार विश्वास बखूबी समझते हैं. अब वह राजनीति के पार्ट-टाइम स्टुडेंट नहीं रहे. एक नेता के तौर पर कहीं ज्यादा परिपक्व और धैर्यवान नजर आने लगे हैं. अमेठी की जनता की ओर से 'अस्वीकृत' किए जाने के बाद उनका मन थोड़ा उखड़ा था, लेकिन दिल्ली चुनावों से पहले वह पूरे मन से पार्टी में सक्रिय हो गए. पार्टी के भावी संयोजक और राज्यसभा की सीट, दोनों को लेकर उनका नाम चर्चा में है.

4.) पंकज गुप्ता: फिलहाल पार्टी के सचिव हैं, फंडिंग के इंचार्ज हैं और केजरीवाल के भरोसेमंद लोगों में से एक हैं. उन्हें लो-प्रोफाइल रहने का इनाम मिल सकता है. वह पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं. सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है. नौकरी छोड़कर सामाजिक कार्य करने लगे. गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाने से शुरू किया, फिर जनलोकपाल आंदोलन से होते हुए AAP में आए.









Wednesday, March 11, 2015

LIC बदलेगी भारतीय रेल की तकदीर

धन की कमी से जूझ रहे रेलवे के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम अच्छी खबर लेकर आया है. बुधवार को उसने रेल से जुड़ी परियोजनाओं के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपये देने का वचन दिया. यह राशि पांच साल की अवधि में दी जाएगी.
यह जानकारी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दी. उन्होंने कहा कि यह वाणिज्यिक निर्णय है. जीवन बीमा निगम पांच सालों की अवधि में रेलवे में 1.5 लाख करोड़ रुपये लगाएगा. यह राशि रेलवे के विभिन्न सहयोगियों द्वारा बांड के रूप में जारी की जाएगी. अगले साल से ऐसे बांड जारी होने शुरू हो जाएंगे.

जीवन बीमा निगम औसतन हर साल 30,000 करोड़ रुपये रेलवे में लगाएगा. पांच सालों तक यह निवेश होगा. यह जानकारी निगम के चेयरमैन एस के रॉय ने दी. निगम हर साल रेलवे द्वारा जारी बांडों को खरीदकर यह निवेश करेगा. इस आशय का एक समझौता रेलवे और बीमा निगम में हुआ है.

यह अभी तय नहीं हुआ है कि इसमें बीमा निगम को कितना ब्याज मिलेगा. लेकिन यह आकर्षक ही होगा.









Friday, February 27, 2015

दुनिया के सबसे लंबे रेल रूट पर चली चीन की ट्रेन, आठ देशों से होकर गुजरी




बीजिंग. रिकॉर्ड बनाने के लिए मशहूर चीन ने एक और रिकॉर्ड बनाया है। यह है सबसे लंबी दूरी की मालगाड़ी चलाने का। इस ट्रेन ने यिवू से स्पेन की राजधानी मेड्रिड तक राउंड ट्रिप पूरी की। यात्रा की शुरुआत नवंबर में हुई थी। इस ट्रेन को चलाने का मकसद यूरोपीय देशों में रेल मार्ग से व्यापार बढ़ाना है। इससे पहले चीन यूरोपीय देशों में अपना माल भेजने के लिए समुद्र या हवाई मार्ग पर निर्भर था। जो कि काफी महंगा पड़ता है।
चीनी अर्थव्यवस्था में आएगा उछाल
चीन के विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्गो ट्रेन चीन की अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। यिवू ने 2014 में 1.82 लाख करोड़ रुपए का सामान निर्यात किया था। अब इस ट्रेन के चलने से यह 28 फीसदी हर साल बढ़ेगा।
ट्रेन में क्या सामान था
चीन से क्रिसमस से संबंधित सस्ते सजावटी सामान, स्टेशनरी और हैंडीक्राफ्ट सामान लेकर स्पेन पहुंची थी। वहां से महंगा जैतून तेल स्पैनिश सामान लेकर लौटी। यहां इसकी काफी मांग है।

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